[30/03 08:32] Pankaj Kumar: लॉक डाउन विचार, नौवां दिन ।
हमसे पहली पीढ़ी,
चलो कम से कम इस बुढ़ापे में एक बच्चा तो अपने पास है, कुछ बीमारी होगी तो अस्पताल तो ले ही जायेगा ।
हमारी पीढ़ी,
चलो कम से कम दो बच्चे तो हैं, सारा दिन आपस मे खेलते कूदते तो रहते हैं, अकेला होता तो परेशान ही हो जाता,
हमारे बाद की पीढ़ी,
चलो एक ही बच्चा है, दो होते तो बहुत ऊधम मचा कर रखते,
इस पीढ़ी का बच्चा, वर्क फ्रॉम होम के दौरान अपने अपने लैपटॉप में बिजी मम्मा और पा से, क्योंकि महानगरीय जीवन के खर्चों व बच्चे को बहुत अच्छे स्कूल में जो डे बोर्डिंग जरूर हो में भेजने के लिए दोनो का कामना जरूरी है ।
मम्मा मैं किसके साथ खेलूं ?
मम्मा उवाच
शोना, कार्टून देख लो, फ़ोन पर स्टोरी सुन लो, और देखो लॉक डाउन खुल जायेगा तो मम्मा तुम्हे CCD ले जाएगी, पिज़्ज़ा hut ले जाएगी ।
पापा के मन मे
कम से कम क्रेच तो खुले ही रखे जाने चाहिए थे ।
इनके दादी और दादा जी जो पीछे रह गए हैं,
अच्छा होता बच्चे यहीं आकर रह लेते हमारे पास लॉक डाउन में, कम से कम पोते या पोती को तो खिला ही लेते ।
कड़वा किन्तु सच ।
यह लॉक डाउन बहुत कुछ सिखा कर जाएगा हम सभी को ।
[30/03 10:00] Pankaj Kumar: हाँ माँ उठ गया ।
चाहे दुनिया इधर से उधर हो जाय पर मां का फ़ोन सुबह आ ही जाता है । कंप्यूटर के की बोर्ड से नजर हटा का उसने माँ का फ़ोन रिसीव कर लिया ।
नहीं मां कनिका अभी सो रही है, उसकी अमेरिका की शिफ्ट थी तो पूरी रात जागी रही ।
नाश्ता कर लूंगा माँ, और अब तो swiggy को भी सरकार ने खोल दिया है उसी से कुछ आर्डर कर लूंगा । तुम अपना ध्यान रखना मैं तुम्हारे खाते में और पैसे डलवा दूंगा ।
नहीं माँ काम वाली तो नहीं आ रही वो लोग भी अपने अपने गांव चले गए । कोई बात नहीं ज्यादा गंदा नहीं रहता है अब तो कोई आता जाता भी नहीं ।
बगल के फ्लैट से आवाज आई, सुनो जी नाश्ता तैयार है आ जाओ । सोच रहा था कि एक रिश्ता MA पास लड़की का भी आया था पर उसे ही धुन सवार थी कि शादी करेगा तो अपने की प्रोफेशन और पैकेज वाली लड़की से ।
कनिका लो चाय पी लो, रात भर काम करके थक गई होगी, नहीं अभी सोने दो जरा और हां बाबू नाईट में मुझे भूख लग गयी थी तो मैंने मैगी बनाई और कॉफ़ी भी, देख लेना बर्तन सिंक में ही होंगे ।
वीडियो कॉन का मैसेज उसकी कंप्यूटर स्क्रीन पर भनभना उठा ।
[30/03 10:10] Pankaj Kumar: वर्तमान समय की सच्चाई बयान करती कुछ स्वरचित लघु कहानियां
[30/03 10:10] Pankaj Kumar: हाँ माँ उठ गया ।
चाहे दुनिया इधर से उधर हो जाय पर मां का फ़ोन सुबह आ ही जाता है । कंप्यूटर के की बोर्ड से नजर हटा का उसने माँ का फ़ोन रिसीव कर लिया ।
नहीं मां कनिका अभी सो रही है, उसकी अमेरिका की शिफ्ट थी तो पूरी रात जागी रही ।
नाश्ता कर लूंगा माँ, और अब तो swiggy को भी सरकार ने खोल दिया है उसी से कुछ आर्डर कर लूंगा । तुम अपना ध्यान रखना मैं तुम्हारे खाते में और पैसे डलवा दूंगा ।
नहीं माँ काम वाली तो नहीं आ रही वो लोग भी अपने अपने गांव चले गए । कोई बात नहीं ज्यादा गंदा नहीं रहता है अब तो कोई आता जाता भी नहीं ।
बगल के फ्लैट से आवाज आई, सुनो जी नाश्ता तैयार है आ जाओ । सोच रहा था कि एक रिश्ता MA पास लड़की का भी आया था पर उसे ही धुन सवार थी कि शादी करेगा तो अपने की प्रोफेशन और पैकेज वाली लड़की से ।
कनिका लो चाय पी लो, रात भर काम करके थक गई होगी, नहीं अभी सोने दो जरा और हां बाबू नाईट में मुझे भूख लग गयी थी तो मैंने मैगी बनाई और कॉफ़ी भी, देख लेना बर्तन सिंक में ही होंगे ।
वीडियो कॉन का मैसेज उसकी कंप्यूटर स्क्रीन पर भनभना उठा ।
[30/03 10:10] Pankaj Kumar: हम सभी के घरों में अक्सर सुनाई देने वाला वार्तालाप ।
लड़का अकेला है भाग्यवान, एक बहन है बड़ी, उसकी शादी हो चुकी है । लड़के का पैकेज भी बढ़िया है । देख लो कर दूं बात पक्की ??
पर लड़के के पिताजी नहीं हैं, हाँ तो क्या हुआ ?? नहीं मैं सोच रही थी कि हमारी टुन्नी को तो किसी के साथ रहने की आदत ही नहीं है, सास की जिम्मेदारी कैसे उठाएगी मेरी बेटी ।
कोई ऐसा देख लो ना जो यह झंझट ही ना हो ।
[30/03 10:10] Pankaj Kumar: हम्म लड़का तो सही है, दो भाई हैं, एक छोटी बहन, लड़के के पिताजी अभी अभी रिटायर हुए हैं, अभी तक तो सरकारी मकान में थे अब शायद अपना घर बनाएंगे ।
पर यह भी तो हो सकता है कि लड़के के ही साथ रहें ?? हम्म तब तो मुश्किल होगा, लड़के पर ही सारी जिम्मेदारी आ जायेगी, माँ, बाप की भी और छोटे भाई बहनों की भी, सुनो कोई दूसरा लड़का ही देख लो हमारी टुन्नी तो घर के काम के बोझ के ही नीचे दब जाएगी ।
[30/03 10:10] Pankaj Kumar: अब ये लॉक डाउन ऐसा हो गया कि ना कोई किसी के पास आ सकता और ना कोई किसी के पास जा सकता ।
टुन्नी का बच्चा अभी छोटा ही है, उसे तो घर ही रह कर काम भी करना पड़ता होगा, दामाद जी भी छुट्टी लेकर घर नहीं बैठ सकते, काश आज कोई हमारी टुन्नी के पास होता ।
[30/03 10:36] Pankaj Kumar: उसने दोनो ही लड़कियों को बहुत लिखाया पढ़ाया । लड़के की इच्छा भी कभी नहीं की । पर आसपास के लोग रिश्तेदार बोलते ही रहते थे कि लड़का होगा तो मुसीबत में काम आएगा ।
दोनो ही लड़कियों की शादी हो गयी, एक दामाद के माता पिता का आकस्मात ही देहांत हो गया । बेटी और दामाद दोनो ही बहुत बोल रहे हैं कि अकेले वहां क्या कर रहे हो हमारे ही पास आकर रह लो ।
शर्मा जी का इकलौता बेटा तो विदेश ही सेटल हो गया शर्मा जी बेचारे खुद भी बीमार और उनकी पत्नी भी बीमार ही रहती हैं । शर्मा जी उससे अक्सर बोला करते थे कि भाई लड़का होने के अपने ही सुख हैं देख लो मान जाओ मेरी बात एक और चांस ले लो वर्मा जी के यहां भी दो बेटियों के बाद लड़का हो ही गया था ।







































































































































































