Thursday, March 26, 2020

कोरोना, जिंदगी और मौत के बीच थोड़ा सा फासला

[26/03 22:35] Pankaj Kumar: कोरोना, जिंदगी और मौत का जरा सा फासला

वर्ष 2020 की शुरुआत ऐसे ही हुई जैसे पिछले सभी वर्षो  की मेरे इस 46 वर्ष के जीवन काल के दौरान हुई है । जनवरी सही से व्यतीत हो जाती है किंतु फरवरी माह में चीन में एक रहस्यमयी बीमारी की खबर आने लगती है । जो कि कोरोना नामक वायरस से फैल रही थी व अत्यंत ही घातक थी जिसके कारण चीन में बड़े पैमाने पर लोगों की मृत्यु होनी शुरू हो गयी थी । फरवरी का अंत आते आते इस बीमारी की दस्तक भारत मे भी सुनाई देनी शुरू हो गयी व  भारत सरकार तुरंत हरकत में आ गयी व लोगों में इसके बचाव हेतु जागरूकता कार्यक्रम शुरू कर दिए गए । मुझे याद आता है कि मैं चकराता से दिनांक 07 मार्च को होली की छुट्टी हेतु जब देहरादून बस अड्डे पहुंचा तो काफी लोग मास्क लगाए मिले, स्थिति की गंभीरता का अनुभव होना शुरू हो गया था । खैर होली सही से गुजर ही गयी किन्तु इसी बीच उत्तराखंड सरकार द्वारा शायद 15 मार्च को प्रदेश के समस्त स्कूलों को 31 मार्च 2020 तक बन्द करने की घोषणा कर दी गयी । मैं होली की छुट्टी के बाद 16 मार्च को चकराता ड्यूटी पर पहुंच गया इसी बीच दफ्तरों में भी कम कार्मिकों के साथ कार्य करने की घोषणा कर दी गयी । इसी बीच सम्पूर्ण विश्व से चौंकाने वाली खबरें आनी शुरू हो गयी थी । चीन के बाद इटली इस बीमारी का दूसरा बड़ा केंद्र बन कर सामने आया जहाँ पर जनहानि चीन का भी आंकड़ा पार कर चुकी थी । इसी बीच मा प्रधानमंत्री महोदय द्वारा देश को संबोधित किया गया और देश वासियों के आह्वान किया कि दिनांक 22 मार्च 2020 को सम्पूर्ण देश वासी अपने अपने घरों में रह कर जनता कर्फ्यू का पालन करें । मा प्रधानमंत्री महोदय की इस घोषणा को देश ने हाथों हाथ लिया व सम्पूर्ण देश थम गया । इस शाम को देश ने एक अन्य ऐतिहासिक दृश्य देखा, मा प्रधानमंत्री महोदय के आह्वान पर देश की समस्त जनता द्वारा अपने अपने घरों में ही खड़े होकर ताली बजाकर, घंटियां बजा कर व थाली व प्लेट बजा कर देश सेवा में लगे लोगों को सम्मान प्रकट करने को कहा गया जिससे समूचे देश से एकजुटता की मिसाल देखने को मिली । इसी बीच 22 मार्च की ही शाम को उत्तराखंड सरकार द्वारा सम्पूर्ण उत्तराखंड को 31 मार्च 2020 तक बंद यानी लॉक डाउन किये जाने की घोषणा कर दी गयी । चूंकि इससे पहले राज्य के सभी कार्मिकों को अपने तैनाती स्थल के ही आवास से कार्य करने की अनुमति दे दी गयी थी किन्तु लॉक डाउन की घोषणा के बाद जो जहां था वहीं रह गया । इसी बीच 24 तारीख को मा प्रधानमंत्री महोदय द्वारा देश को फिर से संबोधित किया गया व बताया गया कि 25 मार्च से 14 अप्रैल तक 21 दिनों की पूरे देश मे ताला बंद यानी लॉक डाउन किया जाना है । अब स्थिति और भी अधिक गंभीर हो चली थी और इटली व अमेरिका से और भी चिंताजनक खबर आने लगी थी कि किस प्रकार इन अति विकसित देशों में भी कोरोना से हजारों की संख्या में लोग अपनी जान दिन प्रतिदिन गँवा रहे थे ।

इसी बीच इन बीमारी के सम्पूर्ण देश मे फैलाव को रोके जाने के उपाय भी शुरू कर दिए गए । लॉक डाउन इसका सबसे महत्वपूर्ण साधन है जिससे कि एक दूसरे से इस वायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है । समूचा देश इस और प्रयासरत है किंतु आज भी कुछ लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं । इसी बीच अन्य कोरोना प्रभावित देशों से चौंकाने वाली वीडियो व खबरें भी आ रही हैं, अनेको भारतीय जो विदेशों में फंसे हैं वीडियो भेज कर भारतवासियों से अपील कर रहे हैं कि 21 दिन के लॉक डाउन का पालन कर लो यही हम सबके लिए अच्छा होगा । आज 26 मार्च को देश के स ही शहरों व गांव में हम सभी भारतवासी अपने अपने घरों में अपने अपने परिवारों के साथ जीवित हैं तथा दूसरे देशों की दुर्दशा को दिन भर चलने वाले अनेकों TV चैनल पर देख रहे हैं । अभी यहां मेरे कमरे में भी इंडिया tv चल रहा है तथा बताया जा रहा है कि कोरोना की दवाई बनाये जाने के प्रयास अमेरिका व अन्य सभी देशों में चल रहे हैं । किंतु आज जब हम पूरी तरह सुरक्षित रह सकते हैं व अपनी जान बचा सकते हैं वह भी मात्र अपने घरों में ही रह कर तो अगर फिर भी हम ऐसा कर पाने में असमर्थ रहते हैं तो शायद फिर इस बीमारी के चंगुल में फंसने से हमे कोई नहीं रोक सकता । कल्पना कीजिये कि कुछ माह पहले चीन व इटली व अमेरिका के भी घरों में सभी लोग सुख पूर्वक रह रहे थे, इनके जीवन मे इतना बड़ा बदलाव अचानक से  आ जायेगा यह शायद उनकी कल्पना से भी परे रहा होगा, जो घर सुरक्षित थे आज वहां मौत का सन्नाटा छाया है और यह मौत व बीमारी इतनी खतरनाक है कि लोग एक दूसरे की मदद के लिए भी आगे नहीं आ रहे हैं, बड़े बड़े व समृद्ध देशों ने इस बीमारी के आगे घुटने टिका दिए हैं, आज शायद हम सभी भारतीयों में पास एक मौका है कि हम अपने आपको व अपने परिवार को इन भयंकर त्रासदी से बचा कर रख सकते हैं ।
देखते हैं कि इस लड़ाई में हम कहाँ तक जा सकेंगे, आज 26 मार्च 2020 की रात्रि 10 बजे तक  देश की आज जो स्थिति है कि कुछ 700 के लगभग संक्रमित लोग हैं और लगभग 42 लोगों की इस बीमारी से मृत्यु हो चुकी है । देश इस महामारी से जूझने की तैयारी में लगा हुआ है । आज की रात हम सभी शांति के साथ सो रहे हैं और यदि चाहें तो आगे की भी बहुत सी रातें ऐसी भी गुजर सकती हैं यदि हमने इसे गंभीरता से ले लिया तो, और अगर नहीं ले सके तो शायद हम भी आने वाले समय मे एक भयानक त्रासदी की और अग्रसर हैं ।