Sunday, February 21, 2021

भारतीय जनमानस में बसी सरकारी अफसर की छवि



अधिकारी हो ?? जी हाँ, मैं बोल देता हूँ । PCS के थ्रू सेलेक्ट हुए ?? जी उत्तराखंड PCS में पहली बार यह पोस्ट आयी थी और हमारा ही पहला बैच है । हम्म अच्छा बढ़िया है ठाट की नौकरी कर रहे हो भाई फिर तो । सरकारी गाड़ी मिली होगी, सरकारी मकान भी मिला होगा । फिर मैं बोलता हूं कि नहीं भाई मैं किराए के मामूली से छोटे से कमरे में रहता हूँ और पैदल या फिर जो भी सवारी चलती हैं उनसे ही आवागमन करता हूँ । और कई बार तो पहाड़ों में गाड़ियों की छत पर बैठ कर या फिर यूटिलिटी और लोडर के पीछे खड़े होकर भी चल देता हूँ । यह सुन कर पूछने वाले को बहुत आश्चर्य होता है तो फिर से पूछा जाता है कि भाई फिर सचिवालय की इतने आराम वाली बिना ट्रांसफर वाली नौकरी छोड़ कर पहाड़ों में क्यों भटकने का निर्णय लिया । और तुम्हारा तो नायाब तहसीलदार में भी सिलेक्शन हुआ था वहीं चले जाते तो एक दिन SDM तो बन ही जाते, गाड़ी मिलती, बंगला मिलता और लोग भी डरते । साथ मे पुलिस का जवान रहा करता हमेशा ।


मैं फिर सोच में पड़ जाता हूँ कि भारतीय समाज मे क्या अधिकारी या अफसर सिर्फ इसलिए ही बना जाता है कि आप ज्यादा से ज्यादा सुविधा उठाओ, लोगों को अपनी पावर से डराओ और अफसर की अकड़ के साथ पूरी जिंदगी काट दो ?? मैं शायद सरकारी अफसर के खांचे में फिट ही नहीं बैठता, चाय पीकर अपना कप खुद साफ करता हूँ, कमरे पर कई बार पानी नहीं आता तो सामने जनता नल पर लाइन में लग कर भी एक दो बाल्टी पानी भर लेता हूँ,शाम को आफिस से 5 किलोमीटर चल कर वापस आता हूँ तो छेडू भाई की दुकान पर 10 रुपये की जलेबी और नेपाली ढाबे पर चाय पिये बिना कमरे की तरफ नहीं बढ़ता । अभी पिछले कुछ दिन पहले ही नेपाली भाई और उनकी पत्नी जो ढाबे पर ही रहती हैं नेपाल से उनके घर से आया हूँ चिड़वा और कुछ मीठा बड़े ही कौतूहल से खिलाया कि सर ये हमारे गांव से आया है क्या आप खा लोगे ??मैंने मजे से खाया और तारीफ भी की । 

आज चकराता में  6 वर्ष होने को हैं, हर दुकानदार, झाड़ू वाला, छोटे छोटे बच्चे, मजदूर, गाड़ियों के ड्राइवर सभी तो मुझे जानते हैं । पर हाँ बहुत ही कम लोगों को पता है कि मैं कौन हूँ ?? क्योंकि भारतीय जन मानस में अफसर या अधिकारी की जो छवि बन चुकी है उससे मैं मेल ही नहीं खाता, क्योंकि मैं उनके ही जैसे एक आम आदमी का जीवन उनके बीच रह कर व्यतीत कर रहा हूँ । ज्यादातर लोग तो मुझे गुरु जी ही कह कर बुलाते हैं । और मैं भी उनका यह भृम नहीं तोड़ता । 😄😄 पर शायद मुझे लगता है कि जो अनुभव मुझे इस आम आदमी के जीवन को जीकर यहां पहाड़ों में हुए वह शायद एक अफसर की अफसरी से कहीं ज्यादा मूल्यवान हैं ।

8 comments:

  1. You are such a pure soul and Down to earth.

    ReplyDelete
  2. Proud on you, if every officers became like you, this country surly will become one day sone ki chiriyan. Jai hind batch, God bless you with endless happyness, have a nice day.

    ReplyDelete
  3. U r an inspiration to me sir ..

    ReplyDelete
  4. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  5. A roll model, very kind hearted and down to Earth person.
    Proud of you Pandit Ji.

    ReplyDelete
  6. Sir, a person with a simple personality like you is rare, gentle, gentle, loyal, is a true soldier of the country.

    ReplyDelete