Tuesday, November 4, 2025

देहरादून के विक्रम में सफर और चौथी सवारी

 सभी शहरों में लोकल में सफर करने के लिए कोई न कोई साधन होता ही है । पुराने समय में साइकिल रिक्शा होती थी, घोड़े तांगे, तिपहिया छोटे साइज के और एक और प्रजाति है इन तिपहिया वाहनों की जिन्हे विक्रम कहा जाता है । उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कई लोकल रूट पर यह प्रजाति यानी विक्रम सवारियों को ठूंस ठांस कर उनके गंतव्य तक सकुशल छोड़ देती है । 

यातायात के इस साधन से देहरादून शहर में मेरा पहला परिचय पहली बार शायद वर्ष 2007 में हुआ था जब मैं दो विक्रम बदल बदल कर आईएसबीटी से पहले परेड ग्राउंड और फिर वहां से रायपुर तक जाया करता था । शुरू शुरू में मुझे इस सवारी में सफर करने का कोई अनुभव नहीं था तो खाली सीट देख कर मैं पीछे ही बैठ जाया करता था । 

शुरू में देखा कि तीन तीन सवारी पीछे वाली सीटों पर बिठाए जाने के बाद ये चल देते हैं और फिर रास्ते में मिलने वाली 2 और सवारियों को आमने सामने वाली सीटों पर एडजस्ट करते हैं । मुझे इसका अनुभव नहीं था तो जब पहली बार चौथा आदमी बैठने के लिए आया तो समझ ही नहीं आया कि ये भाई या बहन कहां एडजस्ट होंगे पर चूंकि वो अनुभवी लोग थे तो अपने लिए जगह बना ही लेते हैं और इस बीच ड्राइवर महोदय भी लगभग डांटते हुए बोलते हैं कि चार चार हो जाओ तो उनकी आज्ञा का भी अनुपालन किया जाना अनिवार्य होता है । 

कई बार मुझे भी वह अभागा चौथा आदमी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है जिसमे कि चौथा आदमी अपने शरीर को अपनी टांगों के सहारे और विक्रम की सीट की आभासी उपस्थिति से खुद को अटकाए हुए रखता है ।

इसी तरह के अनुभवों से तपते हुए समझ में आया कि विक्रम में मात्र एक ही सीट बहुमूल्य है जो कि ड्राइवर साहब के पास वाली आगे की सीट होती है । पहले तो वहां भी ये लोग दो सवारी बिठा लिया करते थे किंतु अब ट्रैफिक विभाग ने नियम थोड़ा सख्त किया तो अब आगे मात्र एक ही सवारी बैठती है । इधर जब से मेरे ज्ञान चक्षु खुले हैं तो अब मैं जब भी विक्रम महोदय में सफर करता हूं तो ड्राइवर महोदय के पास वाली ही सीट पर बैठने का प्रयास करता हूं । इस कारण कई बार तो कई सारे विक्रम निकल भी जाते हैं जिनमे आगे कोई सज्जन पहले ही बैठ चुका होता है और पीछे की सीट पर तीन लोग पहले से ही होते हैं तो वो अभागा चौथा आदमी बनने से बचता हूं ।  आगे की सीट मिलने की जो खुशी होती है उसका अनुभव तभी होता है जब आपकी पदोन्नति उस अभागी चौथी सवारी से ड्राइवर महोदय की बगल वाली सीट मिलने पर होती है ।