नेवी से आने के बाद भी ऐसा कुछ मन में नहीं था कि कोई बड़ी नौकरी करनी है जिस समय 2005 में नेवी की नौकरी छोड़ी उन दिनों फण्ड वगैरा कटने के बाद 5 हजार वेतन हाथ मे आता था जिसमे मजे से जीवन गुजर जाता था, अतः हिसाब यह लगाया कि कम से कम 2 हजार तो पेंशन मिल ही जाएगी और 3 हजार की कोई छोटी मोटी नौकरी तो मिल ही जाएगी अतः चलते हैं 15 साल घर से दूर रह लिए अब अपने ही इलाके में कुछ करेंगे । इसी उम्मीद पर बाहर आये और आशा के अनुरूप ही मुझे पहली नौकरी का आफर भी मिल ही गया एसपी बजाज की एजेंसी पर सेल्स एक्जेक्यूटिव के लिए जगह निकली, उन दिनों सब जगह जहां की vacancy अखबार में दिख जाती थी इंटरव्यू के लिए चले ही जाता था । अतः वहां भी गया उन्होंने सिलेक्शन कर लिया और रुपये 2500 की तनख्वाह का आफर दिया जो मैंने सहर्ष ही स्वीकार भी कर लिया ।
किन्तु उसी समय मेरा बीएड की प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट भी आ गया व मुझे रुड़की kldav कॉलेज में फ्री सीट मिल गयी फीस सिर्फ 2865 रुपये पूरे कोर्स की । उन दिनों निजी बीएड कॉलेज बीएड के एक से डेढ़ लाख रुपये ले रहे थे तो इस हिसाब से मुझे लगा कि चलो बीएड ही कर ली जाय । अतः बीएड करने रुड़की पहुंच गया और बीएड बैच में वाकई कुछ अच्छे तैयारी वाले लोगों से परिचय हुआ जो कि PCS इत्यादि की तैयारी कर रहे थे, गांव में भी स्कूली दिनों के साथी विकास द्वारा भी PCS का इंटरव्यू दिया गया था। अतः शुरुआती प्रेरणा इन्ही लोगों से मिली । किन्तु PCS जैसी बड़ी परीक्षा के विषय मे उस समय भी नहीं सोचा था खैर इधर बीएड हुई और फिर नौकरी की तलाश में लग गया तकरीबन 50 स्कूलों में खुद जा जाकर बॉयोडाटा दे दिया जिसमें सराय का आर्यन पब्लिक स्कूल, होली गंगेश और जवालापुर, कनखल के भी सभी स्कूल थे । रुड़की के pvt स्कूलों में भी बॉयोडाटा दिया गया कॉल आनी शुरू हुई,काफी इंटरव्यू दिए और रुड़की के स्क्यवार्ड पब्लिक स्कूल में 3000 की तनख्वाह की नौकरी मिल ही गयी । बीएड के दौरान साथियों से पूछ कर लुसेंट सामान्य ज्ञान व उत्तराखंड सामान्य ज्ञान के लिए बिनसर ईयर बुक खरीद के खाली समय मे पढ़ना शुरू किया, किन्तु PCS जैसी परीक्षा का लक्ष्य तब भी मन में कहीं नहीं था बस यही था कि कोई भी छोटी मोटी नौकरी मिल जाएगी तो जीवन चल पड़ेगा । इसी बीच उत्तराखंड में LT की रिक्ति आयी और बीएड के बेस पर मुझे पहली सरकारी नौकरी एक हाई स्कूल अध्यापक की मिल गयी टेहरी जिले के एक गांव में जिसका डेढ़ घंटे का पैदल रास्ता होता था, खैर जॉइन किया और कुछ माह रहने के बाद पता चल गया कि यदि कुछ नहीं किया तो पूरा जीवन इसी गांव में गुरु जी के रूप में निकल जायेगा । उसी समय उत्तराखंड सचिवालय के समीक्षा अधिकारी के फॉर्म निकले फरवरी 2007 की बात है मैंने फॉर्म भर दिया, और भूल भी गया । उस गांव की नौकरी में मन नहीं लगा और मेरा चयन रुड़की के आर्मी स्कूल में होने पर मैं सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देकर आर्मी स्कूल की प्राइवेट नौकरी में यही सोच कर चला आया कि घर तो रहना मिलेगा फिर चाहे तनख्वाह कम ही क्यों न मिले । इसी बीच सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में भी चयन हुआ किन्तु वहां के फौजी माहौल को देख कर मन नहीं किया कि फिर ऐसे माहौल में रहा जाए ।
आर्मी स्कूल में मेरा विषय सामाजिक विज्ञान था तथा कक्षा 6 से 10 तक मैं यही पढ़ाता था इसी बीच MA अंग्रेजी हो गयी थी, और MA इतिहास भी । इस स्कूल में बच्चे अच्छे मिले जिनको अच्छी तरह पढ़ाने के लिए मैं भी कुछ न कुछ अतिरिक्त पढ़ता ही रहा और NCERT की कक्षा 6 से 10 की सोशल की तीनों चारों किताबें 2 ही साल की वहां की नौकरी में कंठस्थ याद सी हो गयी । जिसका आगे चल कर बहुत लाभ मिला । खैर रुड़की में आर्मी स्कूल में जीवन शुरू हुआ तो समीक्षा अधिकारी वाला 2007 में भरे फॉर्म का pre एग्जाम शायद सचिन के विवाह की तिथि को ही वर्ष नवंबर 2009 में आ गया, तैयारी कोई विशेष थी नहीं किन्तु दो किताबें लुसेंट और उत्तराखंड सामान्य ज्ञान की पढ़ ही रहा था फिर सोशल यहां बच्चों को पढ़ा रहा था, इसके अलावा प्रतिदिन अखबार पढ़ना ही था और कोई प्रतियोगी परीक्षाओं की पत्रिका पढ़ लेता था । खैर समीक्षा अधिकारी का pre निकल गया और main 2010 में हुआ, उसकी तैयारी मैंने दिल लगा कर स्वयं ही की विकास भी उस परीक्षा को दे रहा था अतः उससे ही काफी जानकारी मिली कि क्या पढ़ना है और कोन सी किताबें लेनी हैं । खैर समीक्षा अधिकारी में मेरा चयन हो गया व 2012 जनवरी में वहां जॉइन कर लिया । उन दिनों उत्तराखंड सचिवालय में अन्य प्रदेश के निवासी भी आ सकते थे अब तो रोक दिया गया अतः हमारे बैच में बड़ी संख्या में उत्तरप्रदेश के बंदे अच्छी रैंकिंग के साथ चयनित होकर आए,इनमे से बहुतों ने UPPCS और IAS तक के इंटरव्यू दे रखे थे, इनकी बात ही अलग हुए करती थी, शुद्ध हिंदी वाले लोग लेकिन पढ़ाई में हम लोगों से बहुत ही आगे । खैर इनसे भी काफी कुछ पता चला कि क्या पढ़ना है किताबें कौन सी ली जानी हैं । लोअर PCS और PCS दोनो ही के pre में निकलने के बाद फिर mains की तैयारी में लग गया कोचिंग का कोई इरादा नहीं था अतः स्वयं ही तैयारी की और बड़ों के आशीर्वाद व ईश्वर की कृपा से दोनो ही में चयन भी हुआ पहले लोअर PCS के द्वारा नायब तहसीलदार फिर PCS परीक्षा के बाद उप शिक्षा अधिकारी में । हालांकि मेरा कम्पटीशन अपने ही जैसे भूतपूर्व सैनिकों से था क्योंकि जनरल के मुकाबले हम बहुत पीछे छूट गए थे, सेना की नौकरी में ऐसा कुछ भी पढ़ने का अवसर नहीं मिला और न ही ऐसा कोई लक्ष्य ही था । अतः युवा साथियों को यही संदेश दूंगा कि शायद मेरे लिए भूतपूर्व सैनिक होने के नाते हो सकता है कम्पटीशन थोड़ा कम रहा होगा और मेरा काम बिना कोचिंग, बिना किसी योजना, बिना किसी नोट्स इत्यादि के चल गया किन्तु वर्तमान में आपका कम्पटीशन अच्छी तैयारी वाले लोगों से ही होना है जो आप ही के जैसे युवा भी हैं अतः अपनी तैयारी मन लगा कर करें, कोचिंग जरूर कर लें क्योंकि आजकल हर बंदा कोचिंग जरूर कर रहा है वहां आपको क्या पढ़ना है, कितना पढ़ना है यह पता चलता है तथा आपका एक ग्रुप बन जाता है जिसके साथ आप मुद्दों पर डिस्कशन कर पाते हैं । हमारा काम बिना कोचिंग इसलिए चल पाया कि पिछले कई वर्षों की कुछ भी पढ़ते रहने की आदत व सामाजिक का शिक्षक बनने का अनुभव और 04 विषयों में मेहनत वाली MA कहीं न कहीं काम आयी । आप यह सब नहीं कर पाएंगे क्योंकि आपके पास न तो इतना लंबा समय है और न ही आप तनाव मुक्त होंगे हम तनाव मुक्त इसलिए रह पाए कि एक तो खाली रह कर ये परीक्षा नहीं दी, दूसरा कोचिंग इत्यादि पर कोई खर्चा ही किया अतः हमारा चयन न भी होता तो हमारा जीवन दूसरी जगह, दूसरी नौकरी में भी चलता ही रहता किन्तु आप लोग लोगों को हमारी तरह संतुष्ट नहीं होना चाहिए युवा हो, जिम्मेदारियों से मुक्त हो अतः कमसे कम एक वर्ष जरूर तैयारी करो, कोचिंग करो और अपने लक्ष्य को प्राप्त करो । मेरी तैयारी की कथा मैं आप सभी को बता ही चुका हूं अब आप अपने लिए अपनी प्लानिंग और स्ट्रेटेजी स्वयं बनाएं । हमने कोचिंग इसलिए भी नहीं ली कि एक तो इनकी फीस भी बहुत होती है दूसरा लगातार किसी न किसी नौकरी में ही रहा, नेवी से आने के बाद बस बीएड करने के ही दौरान अगस्त 2005 से मार्च 2006 तक मैं रेगुलर बीएड कर रहा था अतः कोई नौकरी नहीं कर पाया लेकिन बीएड के बाद फिर कहीं न कहीं नौकरी करता ही रहा इसलिए कोचिंग के लिए कोई ब्रेक नहीं ले सका ।
My PCS and Lower PCS results just to give an idea of the posts for which these exams are conducted. PCS and Lower PCS exams are conducted by the State Public Service Commission to recruit Group B Gazatted Officers for diff state govt departments. Likewise Lower PCS exam is conducted for Non Gazatted Grp C posts but at supervisory level. Thereafter many other exams are conducted to recruit clerks and other grp C staff below the supervisory levels by separate selection process in Uttarakhand Subordinate Selection Commission do conduct them. Selection is depend on the choice and ranking in merit. Eg. For PCS the post of SDM is the topmost which is the first choice for every candidate and in lower PCS the post of Nayab Tehsildar is the topmost post so candidates with higher merit are managed to be selected here and thereafter further merit and choice filled by the candidate. There are few posts where specialised qualification is required like M.Sc Agri, Fisheries, Horticulture, Sociology in Graduation and Journalism diploma. But again you dont know when would the post for these qualification can come. The posts of SDM and DySP comes for each PCS but same can not be said for many other posts. Like there was no post of BDOs in our batch and the post for which I am selected came first time in PCS and thereafter this post has not come in next two PCS exams. So you need to prepare for the topmost post only. If not able to secure it then depend upon the merit where you are finding your place.
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