Sunday, July 4, 2021

एक प्रयास - राजकीयः प्राथमिक विद्यालय त्यूणी

[30/06, 13:13] Pankaj Kumar: इस विद्यालय के पुनर्निमाण हेतु पहले भी 02 बार पैसा आ चुका था किंतु दोनो ही बार पैसा वापस चला गया । कारण रहा जिस जमीन पर यह स्कूल है वह जमीन वर्ष 1960 में इस स्कूल हेतु दान दी गयी थी । इसी स्कूल के उस समय जूनियर हाई स्कूल का भी भवन बना जो कि कालांतर में इंटर कॉलेज बन कर दूसरी जगह चला गया । वर्ष 2010 तक दोनो ही स्कूलों के भवन खंडहर हो गए तथा चूंकि इंटर कॉलेज दूसरी जगह चला गया था तो उसके खंडहर भवन को गिरा कर उस पर दान देने वाले लोगों ने कब्जा करना शुरू कर दिया । चूंकि अब त्यूणी में जमीनों के रेट बहुत बढ़ गए थे तो दान देने वाले के उत्तराधिकारियों के कम में लालच आ गया कि किसी तरह जैसे इंटर कॉलेज यहां से चला गया वैसे ही यह प्राइमरी स्कूल भी चला जाय ताकि यह जमीन भी खाली हो जाये । इसलिए जब भी पैसा आता था और स्कूल की बिल्डिंग बनाये जाने का प्रयास शुरू होता था तो वो लोग आकर अध्यापकों को डरा धमका देते थे, टीचर भी चूंकि स्थानीय थे तो लोकल लोगों से उलझना नहीं चाहते थे, अधिकारी ने भी किसी ने भी कोई इंटरेस्ट नहीं लिया । इसी बीच 2015 मे मेरी यहां नियुक्ति हुई और आये दिन अखबारों में इस स्कूल की बिल्डिंग छपती रहती थी कि बच्चों की जान से खिलवाड़ । पूछने पर मुझे भी यही बताया गया कि सर इन लोगों से उलझना सही नहीं है लड़ाई झगड़ा करते हैं ।
[30/06, 13:13] Pankaj Kumar: वर्षों के संघर्ष के बाद आखिरकार हम अपने राजकीय प्राथमिक विद्यालय त्यूणी नंबर 1 के विद्यालय के नवीन भवन का पुनर्निमाण करने में सफल हुए ।
[30/06, 13:13] Pankaj Kumar: इस स्कूल को एक उदाहरण के जैसा बनाए जाने का प्रयास था तो जब बिल्डिंग बन गयी तो मैंने सबसे पहले खुद 11 हजार रुपये इस स्कूल को दान देते हए बाकी अपने टीचर्स को भी बोला । इस तरह हमने करीब 70 या 80 हजार रुपये इकठ्ठा किये और इस स्कूल में अच्छी पेंटिंग कराई और टाइल इत्यादि लगाई । इस प्रकार आज यह स्कूल एक उदाहरण के रूप में बन गया है कि यदि ईमानदारी से काम किया जाए तो सरकारी भवन भी अच्छे बन सकते हैं । इस स्कूल में आज 128 बच्चे पढ़ते हैं जो कि गरीब परिवारों से ही आते हैं । अब यह स्कूल इन बच्चों के लिए एक वरदान साबित होगा ।
[30/06, 13:13] Pankaj Kumar: वर्ष 2019 में इस स्कूल के लिए एक टॉयलेट आया मेरे लिए यह मौका था कि मैं यहां कुछ काम करवाना शुरू  करवायु। ताकि यदि मेरे सामने स्कूल को फिर से बनाये जाने का पैसा आएगा तो अंदाज हो सकेगा कि ये लोग काम करने देंगे या नहीं । इस बार सारी जिम्मेदारी मैंने ही ली क्योंकि लोकल टीचर भी किसी पंगे में फंसना नहीं चाहते थे । इस काम की जिम्मेदारी मेरे द्वारा लेते हुए जुलाई 2019 मैं त्यूणी ही चला गया और पुरानी टॉयलेट को तुड़वाने का काम खुद खड़े होकर शुरू किया । दूसरे लोग आए और ऐतराज करने लगे मैंने कहा कि भाई आपकी धमकी से काम नहीं रुकेगा, ना ही डराने और धमकाने से । मैंने इसी बीच SDM को भी बोल दिया था और त्यूणी थाने को भी बोल दिया था कि हम काम शुरू कर रहे हैं किसी भी दिक्कत की स्थिति में आपकी मदद की जरूरत पड़ सकती है । खैर शौचालय तो जैसे कैसे बन ही गया । अब अगले कदम की तैयारी शुरू करनी थी । एक दिन मैं स्कूल गया और वहां की दो बच्चियों से मुख्यमंत्री जी के लिए उनकी ही लिखावट में लेटर लिखवाया और उसे वायरल किया, ट्वीट किया, प्रेस को दिया कि मामला ऊंचे लेवल तक पहुंच सके । इस पत्र का संज्ञान मुख्यमंत्री जी द्वारा ले लिया गया और DM देहरादून को आदेश दिया गया कि मामले को देखें । हमने इस स्कूल के लिए दूसरी जमीन भी देखनी शुरू की लेकिन कोई जमीन नहीं मिली तो फिर बिल्डिंग यहीं बननी थी ।
[30/06, 13:13] Pankaj Kumar: इसी बीच पैसा भी आ गया जो कि काफी कम था क्योंकि यह पुराने समय का रेट था साढ़े बारह लाख जबकि अब साढ़े उन्नीस लाख रुपये दिए जा रहे हैं । खैर स्कूल बनाना ही था, हमने पेरेंट्स के साथ बैठक की और काम शुरू किया । पुरानी बिल्डिंग तोड़ने के टाइम मैं यहीं था ये लोग फिर लड़ने आ गए मैंने पुलिस बुला ली इसी बीच ये लोग कोर्ट में गए और मुझे मेरे नाम से पार्टी बना दिया । चकराता कोर्ट में मामला चला मैं खुद हर तारीख पर गया और यहां से हम जीत गए । हमने काम जारी रखा और वो लोग मामले को अगले कोर्ट ले गए किन्तु इनको कोर्ट से कोई स्टे नहीं मिला हमारा काम जारी रहा ।

इस स्कूल को एक उदाहरण के जैसा बनाए जाने का प्रयास था तो जब बिल्डिंग बन गयी तो मैंने सबसे पहले खुद 11 हजार रुपये इस स्कूल को दान देते हए बाकी अपने टीचर्स को भी बोला । इस तरह हमने करीब 70 या 80 हजार रुपये इकठ्ठा किये और इस स्कूल में अच्छी पेंटिंग कराई और टाइल इत्यादि लगाई । इस प्रकार आज यह स्कूल एक उदाहरण के रूप में बन गया है कि यदि ईमानदारी से काम किया जाए तो सरकारी भवन भी अच्छे बन सकते हैं । इस स्कूल में आज 128 बच्चे पढ़ते हैं जो कि गरीब परिवारों से ही आते हैं । अब यह स्कूल इन बच्चों के लिए एक वरदान साबित होगा ।

कार्य पूर्ण होने से पहले के फोटो