चूंकि मैं जुलाई 2005 में ही आ गया था तो उस समय तक pay कमीशन नहीं आया था और हमको मिला भी नहीं था, यदि और 6 माह मैं नेवी में रहता तो मुझे pay कमीशन मिल जाता किन्तु वहां सेवा बढ़ तो सकती थी पर 05 वर्ष के लिए बढ़ानी पड़ती यानी फिर मैं 37 वर्ष की आयु में वर्ष 2010 में नेवी से आता । मुझे लगा कि अभी चलना सही रहेगा, थोड़ा संघर्ष कर ही लूंगा । उस समय कुल मिला जुला कर साढ़े पांच लाख रुपये नकद व 1860 रुपये माह की पेंशन मिलनी थी ।
यह सब कुछ इसलिए लिख रहा हूँ ताकि नई पीढ़ी यह न संमझ ले कि हमको जो आज मिला है वह ऐसे ही मिल गया, इसके लिए अनेकों वर्षों का संघर्ष रहा है, निराशा के दौर भी आये, हिम्मत भी टूटी किन्तु घर परिवार और बड़ों के सहयोग व आशीर्वाद से सफलता भी मिली । आज 47 वर्ष के इस जीवन का छोटा सा लेखा जोखा प्रस्तुत कर रहा हूँ । इसी वर्ष 02 जुलाई को मेरे व्यावसायिक जीवन या वर्किंग लाइफ के भी 30 वर्ष पूर्ण हो जाएंगे । इन 30 वर्षों में कुछ अंतराल ऐसे भी आये। जिनके दौरान में कुछ समय खाली भी रहा बिना किसी नौकरी के ।
02 जुलाई 1990 से 31 जुलाई 2005 - भारतीय नौसेना में नौसैनिक ।
15 अगस्त 2005 से 31 मार्च 2006 - KLDAV कॉलेज, रुड़की में रेगुलर ब.एड का छात्र, इस दौरान पेंशन व पोस्ट आफिस से मिलने वाला ब्याज ही आजीविका का सहारा रहा । पेंशन 1860 रुपये और ब्याज 3000.00 प्रति माह । इसी तरह 8 माह की पढ़ाई रूड़की में किराए के मकान में रह की ।
अप्रैल 2006 से अक्टूबर 2006 - रुड़की के skyward पब्लिक स्कूल में पहली नौकरी, वेतन 2500.00 प्रतिमाह ।
नवंबर 2006 से दिसंबर 2006 जनपद रुद्रप्रयाग के जवाहर नवोदय विद्यालय में कॉन्ट्रैक्ट टीचर की नौकरी, वेतन लगभग साढ़े सात हजार । यहां मेरा चयन 31 मार्च 2007 तक के लिए हुए था किंतु इसी बीच मेरी उत्तराखंड में हाई स्कूल में सरकारी नौकरी लगी ।
26 दिसंबर 2006 से 30 जून 2009 - टेहरी गढ़वाल के एक गांव के हाई स्कूल में LT अंग्रेजी का अध्यापक ।
01 जुलाई 2009 से 12 सितंबर 2011 तक रुड़की के आर्मी पब्लिक स्कूल 1 में TGT हिस्ट्री ।
13 सितंबर 2011 से 16 जनवरी 2012 तक खाली रहा, आर्मी स्कूल को मुझे सूचना देनी थी कि मेरा चयन हो गया है नियुक्ति पत्र आने पर मैं कार्यमुक्त हो जाऊंगा पर उनके द्वारा मेरे नोटिस दिए जाने के एक माह बाद ही कार्यमुक्त कर दिया गया । अतः इस दौरान खाली रहना पड़ा व बड़ी मुश्किल से ये कुछ माह गुजरे, मकान की किश्त, खर्चा बड़ी मुश्किल से चल पाया ।
17 जनवरी 2012 से 06 जनवरी 2015 तक, समीक्षा अधिकारी, उत्तराखंड सचिवालय ।
07 जनवरी 2015 से वर्तमान, उप शिक्षा अधिकारी चकराता ब्लॉक ।
इसके अलावा कुछ चयन भी हुए जिनमे मैं विभिन्न कारणों से नहीं जा पाया ।
2005, मंगलौर, कर्नाटक, मणिपाल ग्रुप में Asst Manager, Facilities, वेतन उस समय 25 हजार का आफर था जबकि नेवी में मात्र 8500 ही मिल रहा था । इस आफर को छोड़ना बहुत ही कठिन निर्णय था, क्योंकि घर वापस आने पर कोई नौकरी ढूंढनी ही पड़ती और क्या पता मिलती या नहीं भी मिलती । पर मन मे यही विचार आया कि 15 वर्ष तो घर से बाहर जीवन व्यतीत हो ही गया, अब अगर यह नौकरी कर ली तो फिर शायद घर से संपर्क खत्म ही हो चलेगा, बच्चे भी यहीं के माहौल में रम जाएंगे और अपनी जड़ों, परिवार, गांव व रिश्तेदारों से किसी भी संपर्क में नहीं रह सकेंगे । अतः उस आफर को छोड़ कर अपने ही इलाके में आकर किस्मत आजमाने का निर्णय लिया गया ।
2006, ओबेरॉय होटल, नई दिल्ली में सिक्योरिटी मैनेजर, वेतन भी सही था किंतु दिल्ली का जीवन मुझे कभी अच्छा नहीं लगा इसके अतिरिक्त किसी होटल में आ रहे आगंतुकों के विभिन्न नखरे उठाना, और अमूमन निजी क्षेत्र में मैंने थोड़ा बहुत अनुभव किया है कि सिक्योरिटी वालों को कोई इज्जत सम्मान नहीं दिया जाता, अतः वह आफर भी मैंने छोड़ दिया और अपनी 2500 वाली टीचर की नौकरी रुड़की रह कर ही करना उचित समझा ।
वर्ष 2007- पहाड़ों के गांव के सरकारी स्कूल से निकलने का एक अवसर मुझे मिला, मेरा चयन सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में TGT हिस्ट्री के रूप में हुआ, मैं जॉइन करने चला भी गया और 3 दिन वहां रहा भी, उन्होंने मुझे क्वार्टर भी दे दिया था किंतु वहां रह कर यही लगा कि जिन कारणों से फौज की नौकरी छोड़ी है वहीं स्थिति यहां भी दिखाई दे रही है । स्कूल में फौजी अफसर ही प्रिंसिपल बन कर आते हैं तथा वहां अध्यापकों का जीवन कठिन होता है, मुझे लगा कि जिन अफसरों से तंग होकर फौज छोड़ी थी फिर उनके ही अंडर काम करना मुझे कुछ कठिन लगा अतः वह नौकरी भी नहीं करने का निर्णय लिया गया ।
2009 - वाणिज्य कर विभाग में कर सहायक की लिखित परीक्षा पास की किन्तु हिंदी टाइपिंग नहीं आती थी अतः मैं टाइपिंग टेस्ट देने ही नहीं गया ।
2011 - प्रवक्ता, इतिहास उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित । इस समय मैं समीक्षा अधिकारी के रूप में जॉइन कर ही चुका था अतः इस सेवा में नहीं गया ।
2013 - एग्जीक्यूटिव सहायक, IIM इंदौर, यहां मैं अधिकारी के पद हेतु लिखित व इंटरव्यू देने गया था किंतु उनके द्वारा मुझे लोअर पोस्ट के लिए आफर दिया गया, जिसे स्वीकार करना मैंने उचित नहीं समझा ।
वर्ष 2009 - बिरला स्कूल, रानीखेत - आर्मी स्कूल के ही दौरान यहां मेरा चयन हुआ किन्तु यह बॉयज स्कूल था और मेरी दो बेटियां जिनको वहीं पढ़ने की परमिशन तो मिलती पर मुझे ही लगा कि इतने सारे लड़कों के बीच कहीं ये कम।लड़कियां अपने को असहज ना महसूस करें, इसलिए वहां भी जॉइन नहीं किया गया ।
2013, उत्तराखंड लोअर PCS, नायब तहसीलदार, जिसमे मैं कम वेतन के कारण नहीं गया ।
इसके अतिरिक्त निम्नलिखित स्थानों पर असफलता का भी सामना करना पड़ा
1. 1992 - नौसेना में अधिकारी की लिखित परीक्षा से पूर्व की मौखिक परीक्षा ।
2. 1993, मौखिक परीक्षा तो पास किन्तु गणित के कारण लिखित परीक्षा में असफल ।
3. 1997 भारतीय सेना में अधिकारी हेतु CDS, OTA लिखित परीक्षा पास किन्तु SSB से बाहर ।
4. पुनः भारतीय नौसेना में विभागीय कमीशन के जरिये अधिकारी बनने हेतु 3 बार SSB इंटरव्यू, सभी बार स्क्रीनिंग इन किन्तु फाइनल चयन से बाहर ।
5. वर्ष 2009 शायद UPSC, सेंट्रल लेबर कमिश्नर लिखित परीक्षा में असफल ।
6.वर्ष 2004, इंटेलिजेंस bureau, ACIO लिखित परीक्षा में असफल ।
7. वर्ष 2008, मसूरी के वुडस्टॉक स्कूल का टेलीफोनिक इंटरव्यू दिया किन्तु दूसरे चरण हेतु नहीं बुलाया गया ।
8. Asian school, देहरादून, PGT हिस्ट्री, इंटरव्यू से बाहर ।
9. विद्या देवी जिंदल गर्ल्स स्कूल, हिसार, 2008 व 2009 TGT हिस्ट्री हेतु दोनो बार लिखित परीक्षा पास किन्तु शायद पुरुष होने के कारण व योग्य महिला अभ्यर्थी मिलने के कारण अच्छे इंटरव्यू के बाद भी चयनित नहीं हुआ । इस स्कूल में मैं जाने को तैयार था क्योंकि रेजिडेंशियल स्कूल था, मात्र लड़कियों के लिए व स्टाफ के लिए भी अंदर ही सारी फैसिलिटी दे रहे थे ।
10. 2008 - दिल्ली यूनिवर्सिटी, के जीसस एंड मैरी कॉलेज में प्रशासनिक अधिकारी के पद की लिखित परीक्षा पास, 01 पोस्ट के लिए कुल 80 लोगों ने लिखित परीक्षा दी और 20 को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, इन 20 में मैं दूसरे क्रम पर था, किन्तु MA में 55 % न होने के कारण इनके द्वारा मुझे अच्छे इंटरव्यू के बाद भी चयनित नहीं किया गया । उस समय मेरी दो बिषय में MA हो चुकी थी किन्तु दोनो में ही 55 % नहीं आ सके थे अतः 55 % के लिए पुनः तीसरी बार MA करने का निर्णय लिया, तीसरी MA अंग्रेजी में 55.2 % आये किन्तु एक बार पुनः इसको सुधरे जाने हेतु MA राजनीति शास्त्र इसके बाद की जिसमे 57 % आये तब जाकर शांति सी महसूस हुई ।
11. वर्ष 2009 में IIT रुड़की में सहायक सुरक्षा अधिकारी की लिखित परीक्षा पास, इंटरव्यू भी सही रहा किन्तु उन दिनों सायटिका के दर्द के कारण फिजिकल उतना अच्छा नहीं रहा अतः वहां असफल रहा ।
12. वर्ष 2016, 2017, 2019 में तीनों बार IIT रुड़की के Asst Registrar की लिखित परीक्षा पास किन्तु इंटरव्यू में चयन नहीं किया गया ।
13. वर्ष 2016 में IIT गांधीनगर, गुजरात में Asst Registrar की लिखित परीक्षा में असफल ।
14. वर्ष 2006, अरीज, नैनीताल में कार्यालय सहायक लिखित परीक्षा पास किन्तु इंटरव्यू से बाहर बाद में पता चला था कि वहां के डायरेक्टर को भर्ती घोटाले के कारण हटाया भी गया ।
इनके अलावा और भी कुछ इंटरव्यू हो सकते हैं जो मैंने दिए हों क्योंकि संघर्ष के दिनों में मैं किसी भी पोस्ट और जगह के लिए तैयार था । 2008 में मैं जब कुछ दिनों खाली था तो पंजाब के मोगा स्थित एक रेजिडेंशियल स्कूल से कॉल आयी चयन भी हो गया किन्तु वेतन थोड़ा कम दे रहे थे और उसी समय मुझे उम्मीद भी थी कि मेरा आर्मी स्कूल में हो जाएगा तो इसलिए वहां भी जॉइन नहीं किया । यह सब लिखने का उद्देश्य अपनी इस छोटी सी उपलब्धि का ढिंढोरा पीटना कदापि नहीं है वरन आज के युवाओं को बताना है कि अपना लक्ष्य अवश्य निर्धारित करें, अपने कमजोर व मजबूत पक्ष को समय रहते पहचान लें और उसी हिसाब से अपनी तैयारी करें । प्लान B भी सदैव तैयार रखें कि यदि प्लान A में सफलता नहीं मिल रही तो फिर दूसरा विकल्प क्या होगा । मेरी गणित की कमजोरी का भान मुझे हो ही गया था इसलिए मैंने कभी बैंक का कोई फॉर्म भरा ही नहीं, मेरे वही रिटेन निकले जिनमे ज्यादा गणित नहीं था, बाकी पक्ष मेरे मजबूत थे, अंग्रेजी, सामान्य अध्ययन, करंट अफेयर्स, इतिहास, राजनीति शास्त्र इत्यादि की कोई दिक्कत नहीं थी । इस दौरान इन सभी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की कोई सोर्स या सिफारिश का कोई सहारा भी नहीं लिया, बस लगे रहे और अपना प्रयास जारी रखा । इस पूरी प्रक्रिया में एक आदत बहुत काम आयी कुछ भी पढ़ते रहने की, अलग अलग विषयों पर बहुत सी किताबें पढ़ने का मौका मिला जो बहुत ही काम भी आया ।