संघर्षों की कहानी बयां करती हैं ये छोटी छोटी सी जगह
अक्सर कहीं न कहीं ऐसा मौका मिल जाता है जहां मैं किसी छोटी चाय की दुकान या फिर किसी आम साधारण से ढाबे पर लंबे समय तक खाना खाता हूं । इन जगहों पर हम जैसे रोज आने वाले ग्राहक तो आते ही हैं रोज आने वालों के अलावा यहां नए नए लोग भी आते रहते हैं ।
इन जगहों पर समय व्यतीत करना अपने आप में एक बड़ा अनुभव प्राप्त करना होता है ।
यहां बैठ कर यहां आने वाले ग्राहकों के जीवन के संघर्ष की कहानियों से भी जुड़ना हो जाता है । इन आम आदमियों का जीवन सुबह बड़ी जल्दी शुरू हो जाता है और उनके ही हिसाब से जल्दी खुलने वाली ये चाय की दुकानें उनकी जीवन रेखा जैसी होती हैं । जहां ये सुबह सुबह आकर चाय का ऑर्डर देकर एक बीड़ी सुलगा लेते हैं और जब तक चाय बन कर आ जाती है तब तक बीड़ी के धुएं में खोए हुए जीवन के कुछ पलों को इनकी आंखे तलाश करती रहती हैं । बीड़ी और चाय पीना इनके लिए कोई आम सी बात नहीं होती बल्कि यूं कहें कि एक मेडिटेशन सरीखी है जिसे करके ये पुनः तरो ताजा हो उठते हैं । खाने का ऑर्डर दिया और जो भी ढाबे वाले ने परोस दिया बिना कुछ पूछे कहे मजे से खा कर चल देते हैं । अमूमन हम लोग किसी होटल में जाकर डिसाइड ही नहीं कर पाते कि क्या ऑर्डर करना है इतनी देर में तो इनका खाना ही पूरा हो जाता है ।
[02/05, 20:37] Pankaj Kumar: ढाबे और दुकान के मालिकों के जीवन का भी ये दैनिक ग्राहक अभिन्न अंग बन जाते हैं यदि कोई प्रतिदिन का ग्राहक कुछ दिन इनकी दुकान पर नहीं आता तो दुकान मालिक भी चिंतित हो उठते हैं और फिर अपने अनुमान भी लगाने शुरू कर देते हैं कि उनके ना आने के पीछे क्या कारण हुआ होगा । और अमूमन यह कारण सत्य ही निकलता है ।
इन छोटे ढाबों पर खाना ताजा मिलता है क्योंकि इन छोटे दुकानदारों के पास बचे खाने को अगले दिन के लिए रखने का कोई जुगाड नहीं होता तो जो भी बनता है या तो खत्म हो जाता है या फिर ज्यादा से ज्यादा सुबह बनी हुई सब्जी या दाल यदि बच भी गई तो शाम को काम आ जाती है । इन ढाबों और दुकानों पर जीवन को निकट से देखने का मौका मिल जाता है और लगता है कि खुशी प्राप्त करने के लिए ज्यादा सुख सुविधाओं या पैसों की शायद जरूरत नहीं पड़ती । जीवन जीने का संघर्ष जरूर होना चाहिए ।