गांव गांव घूमते हुए मुझे तीन पीढ़ियों के लोगों से मिलने और उनके जीवन तथा अनुभवों को निकट से देखने का अवसर प्राप्त होता है ।
सबसे पहली पीढ़ी जो 65 या 70 वर्ष से ऊपर की है इस आयु के अधिकतर लोग अपने जीवन से संतुष्ट हैं तथा पूर्ण मनोयोग से अपने कार्यों में एक कर्मयोगी की भांति लगे दिखाई पड़ते हैं। इन्हे किसी भी मनोरंजन या समय व्यतीत करने हेतु टेलीविजन या मोबाइल इत्यादि की जरूरत आज भी नहीं है । अपने दैनिक क्रिया कलापों में और परिवार के लोगों और अपने खेतों तथा पशुओं की देख रेख में इनका जीवन व्यतीत हो रहा है । इस पीढ़ी की पढ़ाई या तो बिल्कुल ही नहीं हुई थी या थोड़ी बहुत अपने ही गांव में हुई थी । यह पीढ़ी अपने जीवन से सबसे अधिक संतुष्ट दिखाई देती है ।
दूसरी पीढ़ी जो 40 पार है तथा 65 से कम है । इस पीढ़ी की पढ़ाई हुई है हाई स्कूल, स्नातक इत्यादि तथा कुछ लोग शहर में रह कर पढ़े हैं और अब अपने गांव में रह कर खेती के साथ साथ अन्य कार्य, ठेकेदारी या कोई व्यवसाय भी कर लेते हैं । चूंकि इस पीढ़ी के ही सामने गांव तक सारी सुविधाएं आई हैं तो इस पीढ़ी की निर्भरता अनेकों कारणों से इन आधुनिक सुख सुविधाओं पर बढ़ी है, अपने व्यवसाय इत्यादि हेतु सड़क, बिजली, इंटरनेट तथा मोबाइल की आवश्यकता बढ़ी है इसके अतिरिक्त यह पीढ़ी सरकारी योजनाओं का लाभ इत्यादि लेने तथा राजनेताओं तथा अधिकारियों के भी संपर्क में बनी रहती है । इनका जुड़ाव अपने बुजुर्गों तथा गांव से बना रहता है किंतु अपनी अगली पीढ़ी के लिए या तो किराए पर या फिर खुद के मकान की व्यवस्था शहर में कर दी है। ये अपने खेतों में स्वयं भी कार्य कर लेते हैं और मजदूरों को भी लगा लेते हैं। इन्हें सिस्टम से बहुत सारी शिकायतें होती हैं अतः थोड़ी बहुत राजनीति भी कर लेते हैं।
तीसरी पीढ़ी उपरोक्त पीढ़ी से अगली है जो अपने खान पान, पहनावे और बोली भाषा में बिल्कुल शहरी बन चुकी है । इनके अंदर कक्षा 12 तक की पढ़ाई पूर्ण कर जल्दी ही शहर की तरफ जाने की प्रबल इच्छा रहती है जहां ये सरकारी और प्राइवेट नौकरी की तलाश हेतु तैयारी, कोचिंग इत्यादि भी करते हैं। इनमे जो किसी नौकरी में चयनित हो गए वो वापस गांव नहीं आते और जो किसी भी नौकरी में नहीं गए वो गांव और शहर दोनो से जुड़ तो जाते हैं किंतु गांव से उनका जुड़ाव बस विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तथा ठेकेदारी करने तक ही सीमित है । इनका अधिकांश समय सरकारी दफ्तरों, अधिकारियों और नेताओं के इर्द गिर्द ही गुजरता है । इनकी अगली पीढ़ी शहर में ही रहती है और गांव से उस पीढ़ी का संपर्क बस त्योहारों तक में आना ही बचता है।