Monday, February 23, 2026

BEO Ki Diary


लोकतंत्र, जनता और राजकीय सेवक ।

भारतवर्ष के अधिकांश मध्यम और निम्न माध्यम वर्ग का सबसे पहला लक्ष्य सरकारी नौकरी पाने का सपना होता है । उच्च वर्ग या तो अपने कारोबार देखता है या फिर अन्य कोई कार्य । एक समय एलीट मानी जाने वाली सेवाओं में भी अब सामान्य परिवारों के बच्चे अपनी मेहनत से चयनित होकर आ रहे हैं जैसे कि सेना के अधिकारी और UPSC या फिर राज्यों की सिविल सेवाएं । यानी उसी जनता के बीच से चयनित होकर आये सरकारी लोग कुछ ही समय के बाद जनता के ही बीच में खलनायक के रूप में प्रस्तुत कर दिये जाते हैं । अन्य लोगों की ही भांति सरकारी कार्मिकों का भी कोई ना कोई परिवार होता है और सरकारी सेवा में मात्र अधिकारी या कर्मचारी ही तो है उसका परिवार भी तो जनता ही है । और स्वयं सरकारी कर्मचारी भी उसी देश की व्यवस्थाओं से चयनित होकर आता है । कहीं न कहीं वर्तमान समय में सरकारी कार्मिकों को विलेन साबित करने का प्रयास किया जा रहा है । ऐसे में एक होड़ सी चल पड़ी है कि कौन अपने आपको जनता का कितना बड़ा हितैषी दिखा सकता है । बड़े IAS, DM स्तर के लोग इस हेतु अपनी स्ट्रॉन्ग PR रखते हैं अपने सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए अपनी छवि बनाए जाने का प्रयास करते दिखाई देते हैं वहीं राजनेता भी विभिन्न बैठकों में सरकारी लोगों को जनता के सामने डांट डपट कर, फोन करते हुए वीडियो बना कर अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर जनता की सहानुभूति पाने का प्रयास करते हैं । ऐसे में सरकारी कार्मिक एक निरीह सा बन जाता है खास कर शिक्षा विभाग के अध्यापक और अधिकारी जिनके पास ऐसी कोई पावर नहीं होती कि किसी का कुछ बुरा कर सकें । बाकी जिन विभागों से नेता जी लोगों का काम पड़ता है मसलन तहसील, ब्लॉक, पुलिस इत्यादि उनकी ये लोग शिकायतें भी नहीं करते और विभिन्न बैठकों में अध्यक्षता भी इन्हीं के अधिकारी करते हैं तो ये स्वयं सुरक्षित बने रहते हैं और अन्य विभागों के लोगों को जनता के सामने प्रस्तुत कर देते हैं । यदि ऐसा ही चलता रहा तो आज तो एक निदेशक पर हमला ही हुआ है कल किसी भी आम अधिकारी, और कर्मचारी की मॉब लिंचिंग भी हो सकती है । जिन स्थानों पर सरकारी कर्मचारी के नाम पर मात्र एक शिक्षक दिखाई देता है, पैदल के खतरनाक रास्तों वाले गांव के बच्चों को उनके घर में कैसे कैसे हमारे शिक्षक सभी सुविधाएं जैसे फ्री किताबें, यूनिफॉर्म, मध्यान्ह भोजन, फर्नीचर इत्यादि यह कोई नहीं देखता । बाकी कोई विभाग इन गांव तक कभी कभार ही जाता है लेकिन सबसे बड़े विलेन भी हम ही लोग हैं ।  अपनी पूरी मेहनत करने के बाद भी बुरा भला सुनना कदापि अच्छा नहीं लगता किंतु वर्तमान समय बड़ा ही बुरा चल रहा है।  
#beokidiary

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