Monday, August 3, 2026

Rail Tale

अपने गांव के रेलवे स्टेशन पर हमारे बचपन के दिनों से आज तक मिलने वाली सवारी गाड़ी । जब यह देहरादून की तरफ से आती थी तो दस वाली कहलाती थी और शाम को वापसी में सहारन पुर की तरफ से आने में इसको LD बोला जाता था । बचपन में इस नाम का अर्थ समझ नहीं आता था बड़े हुए तो देखा कि इसका पूरा नाम DLS है यानी देहरादून, लक्सर और सहारनपुर । जिसे शॉर्ट में आम जन LD बोल दिया करते थे । इस ट्रेन की सबसे खास बात थी कि यह कभी लेट नहीं होती थी क्योंकि देहरादून की तरफ से लक्सर पहुंच कर सहारनपुर से चल कर इलाहाबाद तक जाने वाली सवारी गाड़ी इसकी सवारियों की प्रतीक्षा किया करती थी जो उन दिनों सहारनपुर से मुरादाबाद जाने वाले यात्रियों के लिए सहारन पुर मुरादाबाद पैसेंजर जिसका समय सुबह 4 बजे का होता था के बाद दिन में यही गाड़ी होती थी । इसके बाद तो शाम को मात्र हरिद्वार से आगरा कैंट जाने वाली सवारी गाड़ी ही अन्य विकल्प था । खैर अब सुना है कि रेलवे द्वारा काफी सारी सवारी गाड़ियों को बंद भी किया गया है और कुछेक को एक्सप्रेस भी बनाया गया है । किंतु आम आदमी के लिए शायद एक पैसेंजर रेलगाड़ी ही अत्यंत किफायती विकल्प है दूर स्थानों की यात्रा का । वंदे भारत जैसी ट्रेन आम आदमी की पहुंच के बाहर हैं, हां जन शताब्दी अवश्य ही एक दूसरा किफायती विकल्प है प्रतीत होता है वंदे भारत के स्थान पर कुछ रूट जहां यह कम सवारी लेकर चलती हैं यदि जन शताब्दी को लाया जाय तो शायद रेलवे को मुनाफा हो सकता है । देहरादून से दिल्ली एक ऐसा ही रूट है जिस पर लगभग एक ही समय जन शताब्दी और वंदे भारत दोनों ही चलती हैं किंतु मार्ग ऐसा होने के कारण वंदे भारत उतनी गति से नहीं चल पाती । यहां जन शताब्दी ही एक अच्छा विकल्प रहेगा । हो सकता है कि रेलवे का प्रयास हो कि आम जन को जन शताब्दी से वंदे भारत पर लाया जाय और एक दिन जन शताब्दी को बंद किया जाय किंतु ऐसा करना शायद उचित नहीं होगा ।
#railtale 
#indianrailways