Wednesday, August 19, 2026

पहाड़ों का जीवन

अभी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट देखी किसी सज्जन द्वारा दिल्ली छोड़ कर मनाली में ही स्थाई रूप से रहने का मन बनाया और दो ही महीने में वापसी कर ली । मैं स्वयं मैदानी क्षेत्र जिला हरिद्वार से आता हूं और पिछले 10 वर्षों से पहाड़ों में तैनात हूं और किराए के कमरों में अकेला ही रहा हूं । कई बार मेरे फोटो जो मैं सोशल मीडिया पर डालता हूं काफी लोग पूछते हैं कि जमीन मिलेगी क्या, हमको भी रहना है वगैरह । लेकिन अपने दस वर्षों के अनुभव में मैने पाया है कि 
1. पहाड़ों में वही रह सकता है जिसने कम साधनों और सुविधाओं में रहना सीख लिया है । खास कर बरसात और बर्फबारी के दिनों में बिना नेटवर्क, सड़क और बिजली के आपको लंबे समय तक रहना पड़ सकता है तो की काफी उबाऊ अनुभव भी हो सकता है और जब चारों तरफ की सड़कें टूट चुकी हैं और आपको कहीं अर्जेंट जाना है तो आप अपने आपको फंसा हुआ सा महसूस करते हैं ।
2. कई बार आपको अकेलापन भी महसूस हो सकता है क्योंकि आप चाहे जितना भी लंबे समय अपने स्थान से अलग कहीं गुजार लें स्थानीय लोगों के लिए आप बाहरी ही रहते हैं फिर आपकी बोली, भाषा, रीति रिवाज और पहनावा त्यौहार भी अलग होते हैं जिनमें आप प्रतिभाग नहीं कर पाते। अमूमन ऐसा होता है कि स्थानीय जन जीवन के एक दायरे से आपको बाहर ही रखा जाता है । स्थानीय लोग आपको कई बार बहुत साधन संपन्न और अमीर आदमी भी समझ कर आर्थिक मदद की भी अपेक्षा रख सकते हैं जो यदि आपने कर दी तो सही है और नहीं कर पाए तो फिर आपको अत्यंत हेय दृष्टि से भी देखा जा सकता है । कई बार लोगों की अपेक्षा रहती है कि उनके बच्चों को शहर कहीं रख दिया जाय, नौकरी लगवा दी जाय, पढ़ाई में मदद कर दी जाय यदि आप कर सके तो सही और नहीं कर सके तो फिर आपको एक मतलबी सा समझ लिया जाता है। 
3. पहाड़ों में छोटी सी दूरी तय करने में भी आपको पूरा दिन लग सकता है खास कर बारिश और बर्फबारी में ऐसे में यदि किसी मेडिकल आकस्मिकता की स्थिति में आपको जल्दी कहीं जाना हुआ तो आप फंस सकते हैं। 
4. मैदानी लोगों को पहाड़ों के चढ़ाई वाले रास्तों पर चलने का भी अभ्यास नहीं होता जिसके कारण थोड़ी बहुत दूरी भी उनके लिए मुश्किल पैदा कर देती है खास कर जब सड़क बंद हो । कई बार घर भी ऐसे स्थान पर हो सकता है जहां आप कोई भी वाहन नहीं ले जा सकते आपकी पार्किंग बहुत दूर होती है तो आपको घरेलू सामान, गैस सिलेंडर इत्यादि के लिए भी किसी और पर निर्भर होना पड़ सकता है पहाड़ों में आपको हर चीज होम डिलीवरी करना संभव नहीं हो पाता । 
यदि आप उपरोक्त सभी चैलेंज झेल सकते हैं तो अवश्य ही पहाड़ों में स्थाई रूप से रहने के बारे में सोचें अन्यथा तो साल के कुछ महीनों के लिए ही आएं और अपना ठिकाना मैदानी इलाकों में भी रखें । स्थानीय लोग इसलिए यहां खुशी खुशी रह लेते हैं कि उनका अपना परिवेश है कदम कदम पर गांव गांव में उनके अपने रिश्ते नातेदार होते हैं समय समय पर शादी विवाह और अन्य उत्सव, स्थानीय मेले, धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं तो उनका तो मन लगा रहता है लेकिन आप ऐसे समय अपने आपको अकेला महसूस कर सकते हैं । सुबह भ्रमण पर अपनी गायों को चरने के लिए ले जाते एक स्थानीय सज्जन से बातचीत हुई । यही है पहाड़ों का सीधा सादा जीवन । 
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