वर्ष 2015
मैं अपनी पहली पोस्टिंग के ब्लॉक के सबसे दूर के स्कूल त्यूणी में गया तो देखा स्कूल बहुत ही जीर्ण शीर्ण है और बच्चों के बैठने के लायक भी नहीं है । पता चला कि जिन्होंने जमीन दान दी थी अब वो लोग चाहते हैं कि जमीन वापस मिल जाय और स्कूल कहीं और बने । खैर हमने कहीं और जमीन ढूंढने का बहुत प्रयास किया किन्तु हमें जमीन मिली ही नहीं ।
वर्ष 2020
हमने उसी जमीन पर स्कूल बनवाना शुरू किया किन्तु मामला ऐसा था कि वो लोग लड़ाई पर उतारू थे और कोई भी smc अध्यक्ष काम करने को तैयार ही नहीं था । हमने smc बैठक बुलाई और दो महिलाओं को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुना जिनके बच्चे उस स्कूल में पढ़ते थे ।
मैने दोनों की ही सुरक्षा की गारंटी ली और पुलिस, प्रशासन सभी को अवगत भी करा दिया । हमारा स्कूल बन गया।
आज उन्हीं दो महिलाओं में से एक की कॉल आई और उन्होंने बताया कि सर मेरी बेटी का हिमज्योति स्कूल में चयन हो गया है । मैने उन्हें इस स्कूल के विषय में उस समय बताया था और उन्होंने पहले बड़ी बड़ी को परीक्षा दिलवाई किंतु उसका चयन नहीं । उन्होंने हार नहीं मानी और फिर छोटी बेटी को भी परीक्षा दिलवाई और आज दिनांक 19.3.2026 को उनसे यह अच्छा समाचार सुनने को मिला । उनके पति भवन निर्माण मिस्त्री का कार्य करते हैं और ये भी सिलाई इत्यादि करती हैं । तीन बेटियां ही हैं । जिनमें से एक अब कक्षा 6 में हिमज्योति जैसे प्रतिष्ठित स्कूल में जाएगी और भविष्य में निश्चित ही अपनी दोनो बहनों को भी मार्गदर्शन प्रदान करेगी । ऐसी छोटी छोटी सी खुशियां ही इस सेवा में आने का उद्देश्य सार्थक कर देती हैं । अब जल्दी ही किसी दिन जाकर बिटिया को आशीर्वाद प्रदान करूंगा।
#beokidiary