मोरी एक परिचय
मोरी उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले का एक दूरस्थ ब्लॉक और तहसील है । मोरी ग्राम पंचायत नानई में आता है । यह देहरादून से दो प्रमुख सड़क मार्गों से जुड़ा है । देहरादून से यहां ज्यादातर मसूरी, नैनबाग, नौगांव, पुरोला तथा जरमोला होते हुए आया जा सकता है । यह मार्ग यमुना नदी की किनारे किनारे नौगांव तक चलता है तथा नौगांव से एक सड़क सीधे बड़कोट होते हुए यमुनोत्री की और जाती है तथा दूसरी सड़क पुरोला होते हुए मोरी होकर हनोल, त्यूनी तथा हिमाचल के रोहड़ू और शिमला तथा मोरी से ही एक सड़क आजकल प्रसिद्ध हो चुके ट्रेकिंग बेस सांकरी तक जाती है । सांकरी से दो प्रमुख ट्रेक शुरू होती हैं जहां काफी बड़ी संख्या में देश विदेश के ट्रेकर हर की दून तथा केदारकांठा ट्रेक के लिए आते हैं । सांकरी से पहले नैतवाड़ नामक स्थान पड़ता है जहां रूपिन और सूपिन नदियां मिल कर टोंस नदी बनती हैं । टोंस नदी कालसी में जाकर यमुना जी में मिल जाती है । हालांकि टोंस नदी यमुना जी की सहायक नदी है किंतु यमुना जी से अधिक मात्रा में जल लेकर आती है । टोंस नदी के ही किनारे पर प्राचीन महासू देवता जी का मंदिर है जो कि त्यूनी से कुछ पहले हनोल नामक स्थान पर स्थित है । त्यूनी के ही रास्ते में एक अन्य प्रमुख महासू मंदिर मेंडरथ नामक स्थान पर भी पड़ता है ।
मोरी चूंकि पहले से आबाद कोई गांव नहीं था अतः यहां कोई पुराना घर या मंदिर स्थित नहीं है । कदाचित नदी के किनारे सिंचित और उपजाऊ भूमि होने के कारण यहां नानाई गांव के लोगों की कृषि भूमि हुआ करती थी जिन्हें पहाड़ों में छानी बोला जाता है जिनमे परिवार का कोई एक सदस्य पशुओं के साथ फसलों की देखभाल करने हेतु अस्थाई घर बना कर रहा करते थे । चूंकि कालांतर में ये दो प्रमुख सड़कें यहां से गुजरी तो आसपास के गांव के लोगों ने यहां घर बना कर रहना शुरू किया होगा, फिर दुकानें खुली होंगी, कुछ होटल भी और कालांतर में प्रशासनिक सुविधा तथा सड़क मार्ग से जुड़ा होने के कारण यहीं पर विकास खंड यानी ब्लॉक बनाया गया और तहसील भी । ब्लॉक और तहसील का मुख्यालय होने के ही कारण यहां अन्य सुविधाएं जैसे कि स्कूल, बैंक, पोस्ट ऑफिस तथा अन्य विभागों के सरकारी कार्यालय खोले गए होंगे । वर्तमान में यहां अच्छी संख्या में दुकानें तथा होटल खुल गए हैं और आसपास के गांव के ही साथ साथ सरकारी विभागों में कार्यरत कार्मिक भी निवास करते हैं । मोरी भी टोंस नदी के ही किनारे पर बसा है तथा चारों और से ऊंचे पहाड़ों से घिरा होने के कारण धूप सुबह को थोड़ा देर से आती है तथा शाम को जल्दी ही विदा भी हो जाती है। आजकल सर्दियों में तो शाम के छः बजते ही यहां अंधेरा हो जाता है तथा 8 बजे तो लगता है कि आधी रात ही हो गई हो ।
मोरी में एक सरकारी प्राइमरी स्कूल, एक सरकारी बालिका हाई स्कूल तथा एक इंटर कॉलेज के साथ ही साथ वर्ष 2021 में एक राजकीय डिग्री कॉलेज भी खोल दिया गया है । जहां बड़ी संख्या में आसपास के दूरस्थ गांव से आए बच्चे यहां कमरे किराए पर लेकर रहते हैं तथा अपनी पढ़ाई करते हैं । यहां घर से दूर रह कर पढ़ने वाली बच्चियां अपने छोटे भाई बहनों की भी देखभाल करती हैं जिनके माता पिता गांव में ही रहते हैं ।
मोरी के आसपास कुछ बड़े गांव भी हैं जैसे खरसादी, देई, मोटाड इत्यादि । यहां रुकने के लिए होटल भी खुल गए हैं तथा भोजन हेतु भी काफी होटल उपलब्ध हैं । मोरी का बाजार ज्यादा बड़ा नहीं है किंतु बड़ी बड़ी दुकानों में जरूरत का प्रायः सारा समान मिल जाता है । मोरी में एक शिव मंदिर तथा एक देवी का मंदिर भी स्थित है । मोरी से टोंस नदी पार करने के लिए एक झूला पुल है तथा त्यूनी की तरफ चलने पर मोटाड़ गांव जाने के लिए बड़ा पुल भी बनाया गया है। सांकरी के नजदीक होने के कारण यहां से बड़ी संख्या में पर्यटक होकर गुजरते हैं जिनमे से कुछ चाय और खाने के लिए रुकते भी होंगे किन्तु चूंकि बाजार में सड़क मार्ग बहुत ही संकरा है अतः यहां के बाजार को इन पर्यटकों का शायद कम ही लाभ मिल पता है क्योंकि उनके वाहनों के लिए पार्किंग की बड़ी समस्या रहती होगी ।
कुल मिला कर एक शांत सी जगह है जहां आप दो नदियों के कलरव के बीच समय व्यतीत कर सकते हैं । दूसरी नदी जिसे स्थानीय लोग खड्ड बोलते हैं केदार गंगा के नाम से जानी जाती है जिसका उद्गम स्थान केदारकांठा बताया गया है। मोरी से आगे सांकरी रोड पर नैतवाड है जहां पर दानवीर कर्ण का मंदिर है तथा दूसरा प्रसिद्ध मंदिर यहां के स्थानीय देवता पोखू जी का मंदिर भी स्थित है । सांकरी से आगे का क्षेत्र पर्वत क्षेत्र बोला जाता है जहां पर ज्यादातर पैदल मार्ग वाले गांव जैसे ओसला, धातमीर, गंगाड, पावनी इत्यादि और अन्य बहुत से गांव हैं । #beopankaj #mori #uttarkashi #uttarakhand
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