Wednesday, March 18, 2020

भारतीय सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन

महिलाओं को सेना में स्थायी कमीशन

इसकी मांग महिला अधिकारियों द्वारा काफी लंबे समय से ही की जा रही थी किन्तु भारतीय सेना द्वारा अनेकों कारणों से इस पर विचार नहीं किया जा रहा था जिसके कारण महिला अधिकारियों को कोर्ट जाना पड़ा और अब निर्णय उनके पक्ष में आया है तो इस पर शीघ्र ही कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी । धातव्य है कि अभी तक भारतीय सेनाओं में महिलाओं को मात्र अधिकारी वर्ग या नर्सिंग अधिकारी के ही रूप में भर्ती किया जाता रहा है, जवान, नौसैनिक व वायुसैनिक के रूप में मात्र पुरुषों को ही भर्ती करने की परंपरा है । अभी भारतीय सेना की पुलिस शाखा में महिला जवानों की भर्ती की गई है जिनकी शायद अभी ट्रेनिंग ही चल रही है । कदाचित अभी अन्य शाखाओं व सेनाओं में महिलाओं की जवानों के रूप में भर्ती पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है ।

खैर महिलाओं ने अपने हक की लड़ाई तो जीत ही ली वैसे सेनाओं में अभी तक स्थाई कमीशन जिसकी अवधि 20 वर्ष होती है महिला डॉक्टरों को तो मिल ही रहा था अब यह बाकी शाखाओं में भी मिलना शुरू हो जाएगा जिससे कि इन शाखाओं में कार्यरत महिला अधिकारियों को भी पेंशन मिलनी प्रारम्भ हो सकेगी ।

यह भी एक दिलचस्प तथ्य है कि भारतीय सेनाओं में ज्यादातर  जवान अपनी कम से कम अनिवार्य सेवा जो कि सेना में 17 वर्ष, नौसेना में 15 वर्ष तथा वायुसेना में 20 वर्ष होती है तथा 17 वर्ष की आयु में भर्ती जवान 32 से 37 या 40 वर्ष की आयु तक अपनी सेवा पूर्ण कर न्यूनतम पेंशन लेकर आ जाता है व अन्य रोजगार की तलाश करता है । सेना में पिरामिड की तरह की बनावट होने के कारण जैसे जैसे वरिष्ठता बढ़ती है ऊपर के रैंकों में रिक्ति कम होती जाती है इसलिए जवान रैंक में भी ऊपर जाने के लिए प्रमोशन के मानक अत्यंत कड़े रखे जाते हैं जिसके कारण अधिकतर जवान अपनी कम से कम सेवा पूर्ण कर सिविल जीवन मे आने हेतु मानसिक रूप से तैयार भी रहते हैं ।

अधिकारी व जवान की सेवा शर्तों व वेतन व अन्य सुविधाओं में बहुत अंतर रखा गया है ।

अधिकारियों को टाइम स्केल प्रमोशन की सुविधा प्राप्त है जो कि जवानों को नहीं मिल पाती । एक अधिकारी के रूप में भर्ती होने वाले युवा को अपनी सेवा के विभिन्न वर्ष पूर्ण करते हुए अगले पद पर प्रोमोशन मिलता रहता है यानी अगर कोई अधिकारी 24 वर्ष की सेवा पूर्ण कर लेता है तो उसे कर्नल (टाइम स्केल) का पद मिलना तय है वैसे कर्नल वह इससे पहले भी बन सकता है यदि कर्नल ( सिलेक्टेड) में चुन लिया जाय जो कि शायद 16 वर्ष की सेवा में भी संभव है । यानी एक अधिकारी के रूप में भर्ती होने पर व अपनी सेवा व स्वास्थ्य ठीक रखे जाने पर हर अधिकारी के पास कर्नल रैंक से रिटायर होने का अवसर प्राप्त होता है जबकि जवान के पास ऐसा कोई अवसर प्राप्त नहीं रहता ।

बहुत कम ही जवान सूबेदार मेजर रैंक तक पहुंच पाते हैं जो कि टाइम स्केल रैंक भी नहीं होता । महिलाओं की इस सफलता से प्रेरणा प्राप्त करते हुए जवानों को भी टाइम स्केल प्रमोशन की मांग की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए जिससे कि सेवा निवृत्ति पर कम से कम उसकी पेंशन तो इतनी हो सके कि उसे अभावग्रस्त जीवन ना जीना पड़े ।

अंत मे जैसा कि प्रचारित किया जा रहा था कि महिलाओं को स्थाई कमीशन देने से भारतीय जवान अधिकतर ग्रामीण पृष्ठभूमि से होने के कारण उनसे तालमेट नहीं बिठा सकेंगे ऐसा कुछ भी नहीं है उल्टे पुरुष अधिकारियों को ही अब अपने भविष्य की चिंता होनी शुरू हो जाएगी क्योंकि महिला अधिकारी अब कम से कम 24 वर्ष तक तो सेवा में टिकी रहेंगी टॉकिं कर्नल रैंक की पेंशन तो मिल ही जाय इससे पुरुष अधिकारियों के पीस पोस्टिंग वाले स्थानों पर इनका कब्जा हो ही जायेगा जिससे कि पुरुष अधिकारी अब ज्यादा से ज्यादा समय फील्ड पोस्टिंग पर ही गुजारने हेतु तैयार भी रहें । जवानों को महिलाओं के साथ काम करने में पहले भी कोई दिक्कत नहीं थी आज भी नहीं है और न भविष्य में होगी क्योंकि जवान भी पुरुष अधिकारियों की तुलना में स्त्रियोचित करुणा व उदारता का भाव लिए महिला अधिकारी के अधीनस्थ कार्य करना शायद ज्यादा पसंद करें ।

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