काली चाय
सुबह हुई दादा और दादी दोनों उठे तो उन्हें लगा कि कुछ कमी सी है। पर कमी भी किसी गाय भी अपनी जगह पर बंधी हुई घास खा रही है और रोज सुबह सुबह उनके आंगन में आने वाली चिड़िया भी शोर मचा रही हैं पड़ोसी के मुर्गे भी बांग देने में व्यस्त हैं और तो और पड़ोस की 80 साल की हो चली सरला भी धूप में अपनी चिलम लेकर बैठ गई ।
सब कुछ तो वही है जैसा इस छोटे से गांव के इस पुराने हो चले घर में बरसों से चलता आ रहा था । आज लेकिन घर में चाय भी नहीं बनी वरना तो स्कूल की पहली घंटी से पहले ही चाय और रात की रखी हुई बासी रोटी मिल जाया करती थी ।
दादा जी रसोई की तरफ बढ़े तो देखा कि दादी चाय तो बना रही है पर बड़ी उदासी के साथ, अनमने ढंग से दादा जी का भी मन उखड़ा हुआ सा ही था । दादी ने दोनों के ही लिए काली चाय बनाई और दोनों ने एक दूसरे को देखा और बिना कुछ बोले अपनी अपनी काली चाय पीने लगे और एक दूसरे से आंख बचाते हुए चूल्हे में जलती हुई आग को देखते रहे । दोनो की ही आंखों में नमी तो थी पर शायद एक दूसरे से अंजान बनने की कोशिश सी कर रहे थे कि ये नमी छुपी रहे ।
इधर स्कूल की घंटी भी बज गई, रोज इस पहली घंटी के समय जो बच्चों को बुलाने के लिए लगाई जाती है दादा जी तैयार हो जाया करते थे और अपनी नतिनी को उसके स्कूल छोड़ने निकलते । दादी नतिनी को चाय नाश्ता कराती क्योंकि खाना तो स्कूल में मिल जाता था ।
खेत तो बंजर हो ही चुके थे और खाने पीने लायक अनाज गांव की राशन की दुकान से मिल जाया करता था और फिर दोनों की वृद्धावस्था पेंशन भी आ ही जाती थी । थोड़े बहुत पैसे बेटा भी शहर से भेजता रहता था क्योंकि कुछ साल पहले आए corona में सब लोग अपने अपने गांव लौट आए, बच्चे भी आए थे और गांव के स्कूल और घर कुछ आबाद से हुए थे। लेकिन अब जब सब कुछ फिर से सामान्य हो चला था तो जो लोग आए थे वापस भी चले गए ।
आज दोनों यही सोच रहे थे कि आखिर ये लोग आए ही क्यों बहुत से वर्षों से तो अकेले ही रहने की आदत डाल ली थी हम दोनों ने अब दो साल से घर में रौनक सी आ गई थी । दोनो बूढ़े जनों को नतिनी के आने से पूरे दिन का काम मिल गया था । स्कूल से आते ही उसकी शोरगुल शुरू हो जाती थी जो रात तक खाना खाकर कहानी सुनने तक चलती । उसे तो पता भी नहीं रहता था कि कब उसकी मम्मी रात में उसको कहानी सुनते सुनते सोते में ही उठा कर अपने पास ले जाया करती ।
इधर दादी को तो उसके जाने के बाद से नींद भी नहीं आई और दादा जी अब स्कूल की पहली घंटी को अनसुना करने का प्रयास करते रहते ।
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