Thursday, February 27, 2025

लघु कथा अंतिमा का टिफिन

लघु कथा 3

अंतिमा का टिफिन

उसे पता भी नहीं था कि उसका नाम अन्तिमा क्यों रखा गया । किसी ने बताया कि वह अपने माता पिता की चौथी बेटी है और पांचवीं बेटी ना हो जाए इसलिए उसका यही नाम रख दिया गया । खैर पांचवां बेटा ही हुआ और अंतिमा का दाखिला तो उसकी अन्य तीन बहनों के साथ गांव के ही प्राइमरी स्कूल में हो गया था । जहां वह अपनी बड़ी बहनों के साथ खुशी खुशी चली जाती ।

भैया भी अब स्कूल जाने लायक हो गया था, अंतिमा बहुत खुश थी क्योंकि बड़ी दीदियां अब दूसरे बड़े स्कूल में चली गई थी और अंतिमा को अकेले ही स्कूल जाना पड़ता था । वह देखती भी रहती थी कि अन्य बच्चियां भी अपने अपने छोटे भाई बहनों का हाथ पकड़े स्कूल जाती हैं । अंतिमा रोज अपनी मम्मी से आकर पूछती कि हमारा भैया कब स्कूल जाएगा । मम्मी समझाती कि अभी बड़ा हो जाने दो ।

अंतिमा एक दिन घर आई तो देखा कि एक नया सा टिफिन भाई लेकर खेल रहा है । थोड़ा सा अंदर आई तो कुछ नए नए से कपड़े और एक नया स्कूल बैग भी दिखाई दिया । और यह क्या कुछ नए और अच्छे से रंग वाले कपड़े, जूते और मोजे भी रखे मिले । 

अंतिमा खुश हो गई कि शायद यह सब उसके लिए ही लाया गया होगा क्योंकि भाई तो अभी छोटा है गुरुजी ने बताया भी था कि बेटा अब 6 साल का बच्चा ही कक्षा 1 में आएगा । छोटे बच्चों की आंगनवाड़ी वाली बुआ जिनकी शादी दूसरे गांव में हो चुकी थी बस महीने के शुरू में आकर राशन बांट जाया करती थी । अंतिमा खुश थी । और पूरी रात उन्हीं कपड़ों को सपने में देखती रही और टिफिन में सोचती रही कि क्या क्या लेकर जाएगी । हालांकि स्कूल में खाना बनता ही है लेकिन उसे मां के हाथ की बनी अलग अलग चीज भी अच्छी लगती थी जो मां आजकल यूट्यूब से देख कर बनाना सीखने लगी थी । हालांकि उसे लग भी रहा था कि मां रोज एक कागज सामने रख लेती है और कुछ पढ़ती है और फिर यूट्यूब खोलती है ।

अगला दिन हुआ, अंतिमा तैयार हुई तो देखा कि जो कपड़े कल आए थे छोटा भैया पहन कर तैयार हो गया है, नए जूते, नया स्कूल बैग, टाई, कोट सब कुछ नया । उसने सोचा कि आज तो भैया का जन्मदिन भी नहीं है हो सकता है कि मां मामा कोट जा रही होगी ।

तभी एक गाड़ी घर के बाहर रुकी मां ने अंतिमा को बोला कि भैया स्कूल जाएगा इसको छोड़ने चलो । अंतिमा हैरान हो गई कि भैया तो अभी छोटा ही है और गुरु जी ने बताया भी था कि अभी उसका दाखिला नहीं होगा । 

उसने बाहर जाकर देखा तो यह तो वही गाड़ी है जिसमें बहुत से बच्चे अभी हाल ही में खुले किसी प्राइवेट स्कूल में जाया करते हैं ।।एक बार उसने भी अपनी मां से कहा था कि मैं भी उसी स्कूल में जाऊंगी तब मां ने समझाया था कि बेटा उसकी फीस बहुत ज्यादा है और गाड़ी का खर्चा भी अलग से । ऊपर से ड्रेस भी खरीदनी पड़ती है अभी तेरे पापा यह सब कुछ नहीं कर पाएंगे । बड़ी सभी बहने जिस स्कूल में जाती हैं उसी में चली जाया कर । अंतिमा मान गई । 

आज लेकिन भैया को उसी स्कूल में भेज दिया गया और टिफिन भी दे दिया । अब अंतिमा रोज देखती कि भैया के टिफिन में रोज कोई ना कोई नई खाने की चीज मां बना कर देती है । क्योंकि भाई के स्कूल वालों ने ऐसा करने के लिए बोला है। 

कल उसके स्कूल मैं सपनों की उड़ान हुई उसने भी एक कविता सुनाई थी और इस बार गुरुजी ने सब बच्चों को टिफिन बॉक्स लाकर इनाम में दिया था । अंतिमा को भी अब अपना टिफिन मिल गया था । पर स्कूल में खाना मिलता ही था तो उसने वह टिफिन घर लाकर भैया को ही दे दिया । कल से अंतिमा अपनी नई बनी सहेली के साथ ही स्कूल जाया करेगी क्योंकि उसके छोटे भाई को भी गाड़ी वाले स्कूल में दाखिल कर दिया गया है ।

No comments:

Post a Comment