Sunday, March 16, 2025
खुशबुओं का संसार
घुमक्कड़ी के बहुत सारे अनुभवों में शायद सभी घुमक्कड़ों को एक अनुभव जरूर हुआ होगा । हर स्थान, हर शहर की अपनी एक जानी पहचानी खुशबू होती है । जैसे ही आप उस क्षेत्र में पहुंचते हैं आपको वहां की जानी पहचानी सी खुशबू आने लगती है । अपने अनुभव में मैं जो कुछ खुशबू अनुभव कर पाया वह कुछ ऐसी रही । उन दिनों के मद्रास और आज के चेन्नई की दो खुशबू आज भी याद आती हैं, महिलाओं द्वारा पहने गए गजरे के फूलों की खुशबू और नारियल के तेल में तली जा रही केले की चिप्स इसके साथ ही साथ हवा में घुली समुद्र की नमी और मंदिरों के आसपास से आती पूजा सामग्री की खुशबू । तब के बॉम्बे की तो समुद्री हवा में मछलियों की खुशबू घुली रहती थी और इसके अलावा माहिम क्रीक की कीचड़ वाली खुशबू बता देती थी कि बांद्रा देहरादून एक्सप्रेस अब बॉम्बे सेंट्रल पहुंचने वाली है । पता नहीं क्यों गोवा की खुशबू में किंगफिशर बीयर सी घुली रहती थी और भी कुछ खास तरह की वहां की लोकल वाइन की खुश्बू उन लोकल बार से आती रहा करती थी जिनके सामने से आप गुजरा करते थे । पहाड़ों की भी अपनी ही खुशबू होती है कहीं कहीं बिच्छू घास की बहुत स्ट्रॉन्ग सी खुशबू आती है और कहीं कहीं किसी और वनस्पति की । हरिद्वार में तो गंगा जी के पास खड़े हो जाओ और गंगा जल की एक अलग की खुशबू आप महसूस कर सकोगे, इसके अलावा हरिद्वार के बाजार में उन छोटी सी संकरी भीड़ भरी गलियों से आप गुजरे हों तो वहां बिकने वाले अलग अलग तरह के अचार की खुशबू ने आपको अचार खरीदने हेतु जरूर प्रेरित किया होगा । गुजरात के पोरबंदर में तो सूखती हुई मछलियों की खुशबू या बदबू आज भी याद आती है । आपके अपने शहर की भी कोई ना कोई विशेष खुशबू जरूर रही होगी । आप सभी घुमक्कड़ों के अनुभव इस खुशबुओं के संसार पर जरूर जानना चाहूंगा ।
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